Thursday, November 29, 2018

1,400 किलो का वो बैल जिसने दुनिया भर में मचाई धूम

जिस तरह पूरी दुनिया में सामान्य से ऊंची कद के इंसानों को हैरत से देखा जाता है ठीक उसी तरह, पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में हज़ारों मवेशियों के झुंड में खड़े इस बैल को दूर से ही देखा जा सकता है और इसे देख कर हैरान हुए बगैर भी नहीं रहा जा सकता.

इसका नाम निकर्स है. ये एक स्टीयर है. स्टीयर्स बधिया किए हुए नर बैल होते हैं. इस बैल का वजन क़रीब 1,400 किलो है और ऊंचाई 6.4 फ़ीट है.

माना जाता है कि यह स्टीयर मवेशियों की बड़ी तादाद वाले ऑस्ट्रेलिया का सबसे ऊंचा बैल है.

हैरत की बात यह है कि इसका यही आकार इसको मौत से बचाने वाला साबित हुआ.

दरअसल जब इस बैल के मालिक ज्योफ़ पियर्सन ने पिछले महीने इसकी नीलामी की कोशिश की तो बूचड़खाने वालों ने कहा कि वो उसे संभाल नहीं सकेंगे.

इस तरह यह बैल बूचड़खाने से बच गया.

ये अब पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में पर्थ से 136 किलोमीटर दक्षिण में स्थित लेक प्रीस्टन फीडलॉट में अपना बचा जीवन गुज़ारेगा.

फिरिजियन नस्ल का है निकर्स

पीयर्सन कहते हैं, "निकर्स (बैल का नाम) की जान बच गई है".

जबसे ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टर ने इस बड़े बैल की ख़बर चलाई है उन्हें पत्रकारों के कई फ़ोन आ रहे हैं.

हॉल्सटीन फिरिजियन नस्ल का यह बैल अपनी प्रजाति के बैलों की औसत ऊंचाई से बड़ा है. उसे बतौर कोच (अन्य मवेशियों के आगे चलने वाले) के तौर ख़रीदा गया था. तब उसकी उम्र महज 12 महीने की थी.

पियर्सन बताते हैं कि जब वो उसे ख़रीदने गए तो वो अन्य स्टीयर्स की तुलना में कुछ बड़ा दिख रहा था. उन्होंने यह भी बताया कि उनमें से कुछ स्टीयर्स को उसी उम्र में बूचड़खाने भेजा जा रहा था.

उन्होंने कहा, "हमने देखा कि वो अन्य स्टीयर्स से बड़ा है और किसी को चोट नहीं पहुंचा रहा तो सोचा कि उसे अभी रहने दिया जाए."

लेकिन कुछ दिनों के बाद उन्होंने यह नोटिस किया कि इसका बढ़ना रुक नहीं रहा, लेकिन अब बेचे जाने के लिए वो काफी बड़ा है.

क़रीब 20,000 मवेशियों के मालिक पियर्सन कहते हैं कि निकर्स के पास अब ज़िंदगी के कुछ ही साल बचे हैं.

वो कहते हैं, "अन्य मवेशियों के बीच निकर्स हिट है. उसके पीछे-पीछे अन्य मवेशी सैकड़ों की तादाद में बाड़े के इर्द-गिर्द चलते हैं. कई मवेशी भूरे रंग के वाग्यू (जापानी) प्रजाति से हैं. उनके बीच काले और सफेद में निकर्स और भी अलग दिखता है."

Thursday, November 15, 2018

दीपिका के भाई ने परिवार में ऐसे किया रणवीर का स्वागत

रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण 15 नवंबर को सिंधी रीति रिवाजों से शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं. यह शादी दो अलग-अलग रीति रिवाजों से हो रही है. 14 नवंबर को यही शादी कोंकणी रीति रिवाजों से हुई थी और अब क्योंकि रणवीर सिंधी हैं तो इसे उनके यहां से रीति रिवाजों से किया जाएगा. हालांकि दोनों की शादी की एक भी तस्वीर अब तक सोशल मीडिया पर नहीं आई है.

इस सबके बीच दीपिका पादुकोण के चचेरे भाई अमित पादुकोण ने ट्विटर पर एक ट्वीट किया. उन्होंने रणवीर का परिवार में स्वागत करते हुए लिखा, "ये जादुई हफ्ता पूरी तरह प्यार में सराबोर रहा है. दो प्यारे और दयालू लोगों की परियों जैसी कहानियां." उन्होंने लिखा, "परिवार में स्वागत है. तुम मुझे एक फिल्मिस्ट कहते हो लेकिन मैं समझौता करने के लिए तैयार हूं."

दीपिका पादुकोण के लिए उन्होंने लिखा, "दीपिका तुम्हें इतना खुश पहले कभी नहीं देखा." दोनों की शादी की तस्वीरें अब तक जारी नहीं की गई हैं. सोशल मीडिया पर पिछले काफी वक्त से दोनों की शादी को लेकर बज चल रहा है. अभी भी दोनों की शादी की तस्वीरों और जानकारी को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बातें जारी है. खबर है कि दोनों की शादी के दौरान सोशल मीडिया पर इतने ज्यादा हैश टैग्स बनाए गए हैं जितने अब तक किसी भी बॉलीवुड वेडिंग में नहीं बने हैं.

दोनों की शादी की तस्वीरें लीक नहीं हों इसके लिए कपल्स ने खास सुरक्षा के इंतजाम किए हैं. लेक कोमो के आसपास मौजूद सुरक्षा के अलावा शादी में आने वाले मेहमानों को फोन नहीं लाने और फोन का इंतजार नहीं करने के लिए कहा गया है.

अयोध्या में 25 नवंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) की रैली को लेकर राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने चिंता जाहिर की है.

राम मंदिर निर्माण को लेकर होने वाले RSS और VHP के कार्यक्रम पर मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या का मुस्लिम समुदाय अगर ऐसी ही दहशत में रहा, तो मुसलमान अपनी जान की हिफाजत के लिए अयोध्या छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे.

उन्होंने कहा कि अयोध्या में साल 1992 की तरह का एक बार फिर से माहौल बनाया जा रहा है. संघ और वीएचपी ने ऐसे ही भीड़ साल 1992 में इकट्ठा की थी. उस समय कोई भी मुस्लिम मस्जिद बचाने नहीं गया था. इसके बावजूद मुस्लिम समाज के घर और दुकान लूटे गए थे.

इकबाल अंसारी ने कहा कि उस समय मुस्लिम समुदाय के लोगों के कारोबार को तबाह किया गया था. वैसा ही माहौल फिर बनाया जा रहा है. हालांकि हम पहले ही कह चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने को तैयार हैं. ऐसे में अब अयोध्या में भीड़ क्यों इकट्ठा की जा रही है.

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को डराने के मकसद से यहां भीड़ जुटाई जा रही है. आपको बता दें कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद मामले की सुनवाई अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रही है. हालांकि साधु-संत और RSS समेत कई हिंदूवादी संगठन राम मंदिर पर संसद में कानून लाने की मांग कर रहे हैं.